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    छत्तीसगढ़

    छत्तीसगढ़ में दृष्टिहीनता की रोकथाम हेतु व्यापक पहल: राज्य के 11 जिलों को भारत सरकार से मिला कैटरेक्ट ब्लाइंडनेस बैकलॉग फ्री स्टेटस (सीबीबीएफएस)

    News DeskBy News DeskJuly 18, 2025No Comments3 Mins Read
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    छत्तीसगढ़ में दृष्टिहीनता की रोकथाम हेतु व्यापक पहल: राज्य के 11 जिलों को भारत सरकार से मिला कैटरेक्ट ब्लाइंडनेस बैकलॉग फ्री स्टेटस (सीबीबीएफएस)
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    रायपुर: मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व एवं स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल के मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग द्वारा दृष्टिहीनता की रोकथाम हेतु वृहद स्तर पर कार्य किया जा रहा है। दृष्टिहीनता के प्रमुख कारणों में से एक मोतियाबिंद है, जो सामान्यतः एक आयुजन्य नेत्र रोग है। एक निश्चित आयु के पश्चात इसका होना सामान्य माना जाता है, किन्तु इसका ऑपरेशन कर दृष्टि पुनः प्राप्त की जा सकती है। इसके उपचार हेतु गुणवत्तापूर्ण निःशुल्क नेत्र ऑपरेशन की सुविधा राज्य के 25 जिला चिकित्सालयों एवं 10 चिकित्सा महाविद्यालयों सहित कुल 43 स्वास्थ्य संस्थानों में उपलब्ध है, जहाँ नियमित रूप से नेत्र ऑपरेशन किए जा रहे हैं।

    राज्य में अप्रैल 2024 से मार्च 2025 तक 1,45,580 तथा अप्रैल 2025 से जून 2025 तक 27,245 मोतियाबिंद ऑपरेशन सफलतापूर्वक किए गए हैं। प्रदेश में भारत सरकार की महत्वाकांक्षी “राष्ट्रीय नेत्र ज्योति योजना” संचालित है, जिसके अंतर्गत सभी जिलों को ‘‘कैटरेक्ट ब्लाइंडनेस बैकलॉग फ्री स्टेटस’’ (सीबीबीएफएस) प्रदान किया जाना है। इस योजना के अंतर्गत दोनों आंखों में मोतियाबिंद से दृष्टिहीन रोगियों की पहचान कर प्राथमिकता के आधार पर ऑपरेशन द्वारा उन्हें दृष्टिहीनता से मुक्त किया जाता है।

    अब तक राज्य के 11 जिलों — कबीरधाम, रायपुर, धमतरी, बलौदाबाजार, बालोद, दुर्ग, राजनांदगांव, खैरागढ़, रायगढ़, कोरबा एवं बस्तर — को दृष्टिहीनता मुक्त घोषित किए जाने हेतु दावा भारत सरकार को प्रेषित किया गया है। वहीं कांकेर एवं बेमेतरा जिलों के दावों का सत्यापन कार्य प्रगति पर है, जिसके उपरांत प्रस्ताव भारत सरकार को भेजा जाएगा।

    दृष्टिहीनता के एक अन्य प्रमुख कारण “ग्लॉकोमा” की भी पहचान और उपचार हेतु विभाग सजग है। यह आंख की एक जटिल बीमारी है, जिसकी प्रारंभिक अवस्था में रोगी को जानकारी नहीं होती और जब पता चलता है, तब तक दृष्टि का ह्रास हो चुका होता है। इसकी गई दृष्टि वापस नहीं लाई जा सकती। इसकी पहचान केवल नियमित नेत्र परीक्षण से ही संभव है। अतः 40 वर्ष की आयु के बाद प्रत्येक 6 माह में नेत्र परीक्षण कराने की सलाह दी जाती है। राज्य के सभी विकासखंड केन्द्रों में इसकी जांच की सुविधा उपलब्ध है।

    कॉर्नियल दृष्टिहीनता की रोकथाम के लिए “कॉर्नियल दृष्टिहीनता मुक्त राज्य योजना” भी संचालित की जा रही है। इसके अंतर्गत सभी जिलों में कॉर्नियल दृष्टिहीन रोगियों की पहचान कर, नेत्र प्रत्यारोपण केन्द्रों से उनका सत्यापन कराते हुए नेत्र बैंक में पंजीयन कराया गया है। नेत्रदान प्राप्त होते ही प्राथमिकता के आधार पर इनका प्रत्यारोपण किया जाता है। जनजागरूकता के माध्यम से नेत्रदान को प्रोत्साहित किया जा रहा है, जिसके परिणामस्वरूप अप्रैल 2024 से मार्च 2025 तक 263 और अप्रैल 2025 से जून 2025 तक 88 नेत्रदान संपन्न हुए हैं।

    अन्य सामान्य नेत्र रोगों के उपचार की सुविधा राज्य के सभी स्वास्थ्य केन्द्रों में निःशुल्क उपलब्ध है। सभी जिला चिकित्सालयों में निर्धारित दिवसों पर स्पेशल क्लीनिक आयोजित किए जाते हैं, जिनके अंतर्गत ग्लॉकोमा, रेटिना, डायबिटिक रेटिनोपैथी, पीडियाट्रिक ऑप्थैल्मोलॉजी सहित अन्य नेत्र रोगों का उपचार किया जाता है। अप्रैल 2024 से मार्च 2025 तक ऐसे 81,000 से अधिक तथा अप्रैल 2025 से जून 2025 तक 25,000 से अधिक रोगियों का उपचार किया गया है।

    गुणवत्तापूर्ण नेत्र स्वास्थ्य सेवाएं, नियमित स्क्रीनिंग शिविर, आधुनिक उपकरणों से जांच तथा तत्काल सर्जरी की सुविधा के माध्यम से प्रदेशवासी निरंतर लाभान्वित हो रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग, छत्तीसगढ़ प्रदेश की जनता को बेहतर, प्रभावी और सुलभ नेत्र चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराने हेतु पूर्णतः प्रतिबद्ध है।

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