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    Home»धर्म»इस नदी को पार करना पापियों के लिए मुश्किल, बुरे कर्म के लोगों को देखकर उबलने लगता है इसका पानी
    धर्म

    इस नदी को पार करना पापियों के लिए मुश्किल, बुरे कर्म के लोगों को देखकर उबलने लगता है इसका पानी

    News DeskBy News DeskSeptember 21, 2024No Comments4 Mins Read
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    सनातन धर्म में 18 पुराणों के बारे में बताया गया है. जिसमें अग्नि पुराण, भविष्य पुराण, ब्रह्मवैवर्त पुराण, लिङ्ग पुराण, ब्रह्म पुराण, पद्म पुराण, विष्णु पुराण, वायु पुराण, भागवत पुराण, नारद पुराण, मार्कण्डेय पुराण, वाराह पुराण, स्कन्द पुराण, वामन पुराण, कूर्म पुराण, मत्स्य पुराण, गरुड़ पुराण, ब्रह्माण्ड पुराण शामिल है. पौराणिक मान्यता के मुताबिक ब्रह्म पुराण सबसे प्राचीन पुराण है. मत्स्य पुराण, सनातन धर्म में संस्कृत साहित्य की पुराण शैली में सबसे प्राचीन पुराण है. नारद पुराण में सभी 18 पुराणों के विषय में विस्तार से बताया गया है. गरूण पुराण में ‘वैतरणी नदी’ के बारे में बताया गया है. जो बुरे कर्म करने वालों व्यक्तियों के लिए नरक में बहती हैं.

    गरुड़ पुराण के अनुसार यह ‘वैतरणी नदी’ यमलोक में बहती है और यह खून और मवाद से भरी है. इसकी दूरी करीब 12 लाख किलोमीटर की बताई जाती है. इस नदी में भयानक जीव-जंतु रहते हैं. जैसे कि मांस खाने वाले पक्षी, मछली, कीड़े, मगरमच्छ, और बड़े वज्र जैसी चोंच वाले खतरनाक गिद्ध. अच्छे कर्म करने वालों मनुष्यों को यमलोक में इस नदी को एक टुकड़े में पार करने के लिए नाव दी जाती हैं.

                                                    “क्रोधो वैवस्वतो राजा तृष्णा वैतरणी नदी
                                                    विद्या कामदुधा धेनुः संतोषो नन्दनं वनम्”
    अर्थात्– क्रोध साक्षात् यम है. तृष्णा नरक की ओर​ ले जाने वाली वैतरणी है.
    ज्ञान कामधेनु है. और​ संतोष ही तो नंदनवन है.

    वैतरणी नदी की भयंकर यातनाएं
    पुराणों के अनुसार धरती पर मनुष्यों के द्वारा किए गए पाप से मिलने वाली यातनाएं इस नदी में मिलती हैं पापी आत्माएं मरने के बाद रोते हुए यहां गिरती हैं और भयंकर जीव-जंतुओं से दंशित होकर त्रासित होती हैं. यमलोक के मार्ग पर इस नदी को पार करना पापियों के लिए बहुत मुश्किल होता है. नदी के अंदर पापी आत्माएं जलती हैं. नरभक्षी कीड़े-मकोड़ों और जानवर उनका मांस नोच-नोच कर खाते है. मान्यता है कि इस नदी में मौजूद खून किसी भी पापी आत्मा को देखकर उबलने लगता है और नदी भयंकर लहरों के साथ गर्जना करने लगती हैं.

    नारद पुराण में भी हैं इस नदी का ज्रिक
    इस पुराण के मुताबिक एक बार धर्मराज राजा भगीरथ के दर्शन करने आए थे जो सगर के कुल में जन्में थे जो सातों द्वीप और समुद्रों समेत इस पृथ्वी पर शासन करते थे. राजा भगीरथ ने धर्मराज से कहा. प्रभु आप धर्मों के ज्ञाता हैं. आप समदर्शी भी हैं. मुझ पर कृपा करके बताइए कि यमलोक में कितनी यातनाएं बताई गई हैं और वे किन्हें मिलती हैं? धर्मराज ने बताया कि अधर्म जनित यातनाएं असंख्य कही गई हैं. जिनका दर्शन ही भयंकर है. मैं इसका सक्षिप्त में वर्णन करता हूं. जो लोग महापुरुषों की निंदा करते हैं.जो भगवान शिव और विष्णु से विमुख होकर नास्तिक हैं. वे लोग यमलोक में करोड़ों वर्षों तक नमक का सेवन करते हैं. जो लोग विश्वासघाती, मर्यादा तोड़ने वाले और पराए अन्न के लोभी होते हैं. वे वैतरणी नदी में जाते हैं. इस तरह से धर्मराज ने राजन को यमलोक में दी जानें वाली कई भयंकर यातनाओं के बारे में बताया हैं.

    धर्मशास्त्र में वैतरणी नदी को पार करने के लिए कुछ उपाय
    धर्मिक मान्यताओं के अनुसार मृत्यु के बाद जिन मनुष्यों के परिवार उनके लिए विधिवत कर्मकांड करते हैं. वे हीं इस नदीं को पार करने समर्थ होते हैं. जो सत्कर्म में लगा हुआ हो.उस यत्नपूर्वक दान देना चाहिए. जो दान श्रद्धापूर्वक और भगवान विष्णु के समर्पण पूर्वक दिया गया हो. जो उत्तम पात्र के याचना करने पर दिया गया हो वह दान अत्यन्त उत्तम माना गया है. पितृ पक्ष के दौरान उन 15 दिनों की अवधि में मनुष्य अपने पितरों को श्रद्धापूर्वक स्मरण करते हैं और उनके लिये पिण्डदान करते हैं. उनके हीं पूर्वजों की आत्माएं इस नदी को पार कर पाती हैं बाकी इस नदी में डूब जाती हैं या फिर पार करने के लिए लगातार संघर्ष करती हैं. कहते है लोगों द्वारा दान में दी गई गाय सबसे ज्यादा मूल्यवान होती है. कलयुग में दान देना सबसे बड़ा पुण्य का काम हैं.

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