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    छत्तीसगढ़

    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘जन शक्ति से जल शक्ति’ के आह्वान को छत्तीसगढ़ ने जनभागीदारी से जमीन पर उतारा : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय….

    News DeskBy News DeskSeptember 9, 2026No Comments8 Mins Read
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    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘जन शक्ति से जल शक्ति’ के आह्वान को छत्तीसगढ़ ने जनभागीदारी से जमीन पर उतारा : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय….
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    रायपुर: जल संरक्षण और भूजल प्रबंधन के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ ने ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। प्रदेश में अब एक भी विकासखंड भूजल दोहन की ‘क्रिटिकल’ श्रेणी में नहीं है। भूजल संसाधन आकलन-2026 में यह महत्वपूर्ण तथ्य सामने आया है। वर्ष 2020 में प्रदेश के 9 विकासखंड क्रिटिकल श्रेणी में थे और वर्ष 2025 तक भी 5 विकासखंड इस श्रेणी में बने हुए थे। वर्ष 2026 के आकलन में ये सभी पांच विकासखंड क्रिटिकल श्रेणी से बाहर आ गए हैं।

    इतना ही नहीं, इस आकलन चक्र में प्रदेश के 12 विकासखंडों की भूजल श्रेणी में सुधार दर्ज किया गया है, जबकि एक भी विकासखंड की स्थिति नहीं बिगड़ी है। विकासखंडवार भूजल आकलन प्रारंभ होने के बाद यह छत्तीसगढ़ का अब तक का सबसे बड़ा एक-चक्रीय सुधार है। प्रदेश में सुरक्षित विकासखंडों की संख्या बढ़कर अब 127 हो गई है।

    केंद्रीय भूमि जल बोर्ड और राज्य भूजल सर्वेक्षण मंडल द्वारा संयुक्त रूप से तैयार भूजल संसाधन आकलन-2026 को राज्य स्तरीय भूजल आकलन एवं प्रबंधन समिति द्वारा अनुमोदित किया गया है।

    मुख्यमंत्री ने इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर प्रदेशवासियों को बधाई देते हुए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी के ‘जन शक्ति से जल शक्ति’ के आह्वान और उनके द्वारा प्रारंभ किए गए ‘जल संचय जन भागीदारी’ अभियान ने प्रदेश में जल संरक्षण के प्रयासों को नई दिशा और व्यापकता प्रदान की है। शासन के विभिन्न विभागों, जिला प्रशासन, किसानों और आम नागरिकों की भागीदारी से जल संरक्षण का प्रयास आज एक व्यापक जन आंदोलन का स्वरूप ले चुका है।

    *जनभागीदारी ने असंभव लगने वाले लक्ष्य को संभव बनाया : मुख्यमंत्री श्री साय*

    मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने इस उपलब्धि का श्रेय प्रदेश के किसानों, नागरिकों और मैदानी अमले को देते हुए कहा कि यह परिणाम केवल शासन की नीतियों का नहीं, बल्कि जनभागीदारी और सामूहिक संकल्प का परिणाम है।

    मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि यह उपलब्धि महानदी भवन में नहीं, बल्कि खेतों और गांवों में हासिल हुई है। इसका सबसे बड़ा श्रेय बेमेतरा और राजनांदगांव सहित प्रदेश के उन किसानों को जाता है, जिन्होंने आने वाली पीढ़ियों की जल सुरक्षा के लिए अपने खेती के तौर-तरीकों में बदलाव स्वीकार किया। हमारे मैदानी अमले ने भी मौसम-दर-मौसम किसानों के साथ मिलकर निरंतर काम किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के ‘जन शक्ति से जल शक्ति’ के आह्वान पर छत्तीसगढ़ ने यह सिद्ध किया है कि जनभागीदारी से भूजल संरक्षण के क्षेत्र में बड़ा और स्थायी बदलाव लाया जा सकता है।

    मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी द्वारा शुरू किए गए जल संचय जन भागीदारी अभियान ने पूरे शासन तंत्र को एक साझा लक्ष्य के साथ कार्य करने का मजबूत आधार दिया। जल संरक्षण के लिए सरकार के प्रयासों के साथ जब किसानों और नागरिकों की भागीदारी जुड़ी, तब उसके परिणाम भूजल स्तर में हुए इस ऐतिहासिक सुधार के रूप में सामने आए हैं।

    *भूजल रिचार्ज 14.65 BCM के ऐतिहासिक उच्च स्तर पर*

    भूजल संसाधन आकलन-2026 के अनुसार प्रदेश में वार्षिक भूजल रिचार्ज बढ़कर 14.65 बिलियन घन मीटर (BCM) हो गया है, जो अब तक का सर्वोच्च स्तर है। वर्ष 2017 में प्रदेश का वार्षिक भूजल रिचार्ज 11.57 BCM था।

    जल संरक्षण संरचनाओं के व्यापक निर्माण और पुनर्जीवन का सीधा प्रभाव भूजल रिचार्ज पर दिखाई दे रहा है। वर्ष 2020 की तुलना में तालाबों एवं पोखरों से होने वाले भूजल रिचार्ज में 266.9 प्रतिशत तथा अन्य जल संरक्षण संरचनाओं से होने वाले रिचार्ज में 202.8 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।

    वर्ष 2026 के भूजल आकलन के लिए प्रदेशभर में कुल 2 लाख 28 हजार 736 जल संरचनाएं दर्ज की गई हैं। जल संचय जन भागीदारी तथा जल शक्ति अभियान : कैच द रेन के अंतर्गत निर्मित और पुनर्जीवित जल संरचनाओं ने भूजल पुनर्भरण की क्षमता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

    *रिकॉर्ड इतिहास में पहली बार भूजल दोहन में वार्षिक गिरावट*

    आकलन का दूसरा महत्वपूर्ण पहलू यह है कि प्रदेश में भूजल दोहन में भी गिरावट आई है। वर्ष 2026 में कुल भूजल दोहन 6.21 BCM दर्ज किया गया है, जबकि पिछले आकलन चक्र में यह 6.30 BCM था। उपलब्ध आकलन रिकॉर्ड में यह पहली वार्षिक गिरावट है।

    प्रदेश में भूजल दोहन का स्तर वर्ष 2022 में 49.5 प्रतिशत के उच्च स्तर पर पहुंच गया था, जो अब घटकर 46.37 प्रतिशत रह गया है। यह 70 प्रतिशत की सुरक्षित सीमा से काफी नीचे है।

    यह सुधार केवल बेहतर वर्षा या भूजल रिचार्ज बढ़ने का परिणाम नहीं है। भूजल दोहन में वास्तविक कमी यह दर्शाती है कि प्रदेश में जल की मांग के बेहतर प्रबंधन, फसल विविधीकरण, जल संरक्षण और किसानों की सहभागिता के प्रयास जमीनी स्तर पर प्रभावी हुए हैं।

    *फसल विविधीकरण से बेमेतरा और राजनांदगांव में बड़ा बदलाव*

    भूजल संसाधन आकलन में गर्मी के मौसम में धान के रकबे में आई कमी को भूजल दोहन घटाने का एक महत्वपूर्ण कारण माना गया है। विशेष रूप से बेमेतरा और राजनांदगांव जिलों में किसानों की सहभागिता से उल्लेखनीय परिणाम सामने आए हैं।

    बेमेतरा जिले में गर्मी के धान का रकबा लगभग 26 हजार हेक्टेयर से घटकर 5 हजार हेक्टेयर रह गया है। इसी प्रकार राजनांदगांव में यह रकबा 9,400 हेक्टेयर से घटकर लगभग 2,800 हेक्टेयर हो गया। दोनों जिलों में मिलाकर गर्मी के धान के रकबे में लगभग 27,600 हेक्टेयर की कमी आई है।

    इसका प्रभाव भूजल की स्थिति पर स्पष्ट रूप से दिखाई दिया है। बेमेतरा लगातार चार आकलन चक्रों के बाद क्रिटिकल श्रेणी से बाहर आया है। जिले में वर्ष 2023 की तुलना में कुल भूजल दोहन में लगभग 20 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है।

    राजनांदगांव में भी उल्लेखनीय सुधार हुआ है। वर्ष 2022 में यहां भूजल दोहन का स्तर 70.5 प्रतिशत तक पहुंच गया था। अब यह विकासखंड पूर्णतः सुरक्षित श्रेणी में आ गया है। यहां सिंचाई के लिए भूजल दोहन में वर्ष 2023 की तुलना में 16.4 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है।

    मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि किसानों द्वारा फसल पद्धति में किया गया यह बदलाव केवल आज के लिए नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों की जल सुरक्षा के लिए किया गया महत्वपूर्ण योगदान है। किसानों ने दीर्घकालिक हित को प्राथमिकता देकर पूरे प्रदेश के सामने जल संरक्षण का अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया है।

    *11 जिलों के 19 अर्ध-संकटग्रस्त विकासखंडों पर अब विशेष फोकस*

    मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रदेश की उपलब्धि महत्वपूर्ण है, लेकिन जल सुरक्षा की दिशा में अभी आगे और काम करना है। वर्तमान में 11 जिलों के 19 विकासखंड अर्ध-संकटग्रस्त श्रेणी में हैं।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2030 तक छत्तीसगढ़ का कोई भी विकासखंड भूजल तनावग्रस्त नहीं रहेगा। अब हमारा विशेष ध्यान अर्ध-संकटग्रस्त विकासखंडों पर होगा। जल संरक्षण, भूजल पुनर्भरण, फसल विविधीकरण और जनभागीदारी के माध्यम से इन्हें भी सुरक्षित श्रेणी में लाया जाएगा।

    इस लक्ष्य की दिशा में वर्ष 2026-27 के दौरान बेमेतरा, बिलासपुर और जांजगीर-चांपा जिलों के लगभग 5,442 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में NAQUIM 2.0 के अंतर्गत जलभृत मानचित्रण अध्ययन प्रस्तावित किया गया है। इससे भूजल की उपलब्धता, जलभृतों की स्थिति और क्षेत्रवार प्रबंधन की जरूरतों का अधिक वैज्ञानिक आकलन संभव होगा।

    उल्लेखनीय है कि प्रदेश में भूजल की स्थिति में आया सुधार किसी एक विभाग के प्रयास का परिणाम नहीं है। जल संचय जन भागीदारी अभियान तथा जल शक्ति अभियान : कैच द रेन के अंतर्गत जल संसाधन, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, कृषि, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी सहित विभिन्न विभागों और जिला प्रशासन ने समन्वित रूप से कार्य किया है।

    गांवों में जल संरक्षण संरचनाओं के निर्माण एवं पुनर्जीवन, वर्षा जल संचयन, भूजल पुनर्भरण, जल के विवेकपूर्ण उपयोग, फसल विविधीकरण और किसानों को कम पानी वाली फसलों के लिए प्रेरित करने जैसे प्रयासों को एक साथ आगे बढ़ाया गया। इसी समग्र दृष्टिकोण ने भूजल रिचार्ज बढ़ाने के साथ-साथ भूजल दोहन को कम करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

    *राष्ट्रीय जल शिखर सम्मेलन के संकल्प के बाद बड़ी उपलब्धि*

    यह उपलब्धि ऐसे समय सामने आई है, जब मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने हाल ही में 1 और 2 सितंबर 2026 को आयोजित राष्ट्रीय जल शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के समक्ष छत्तीसगढ़ में जल संरक्षण और जल सुरक्षा के क्षेत्र में हो रहे कार्यों एवं उपलब्धियों को प्रस्तुत किया था।

    प्रधानमंत्री श्री मोदी के मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ ने जल सुरक्षा से जुड़े लक्ष्यों को राष्ट्रीय समय-सीमा से पहले प्राप्त करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ने का संकल्प व्यक्त किया है। भूजल संसाधन आकलन-2026 के परिणाम इस दिशा में प्रदेश की प्रगति को रेखांकित करते हैं।

    राज्य सरकार अब इस उपलब्धि को अगले चरण में ले जाते हुए वार्षिक ‘कैच द रेन’ योजना 2026-27 को विकासखंड स्तर के मासिक लक्ष्यों के साथ लागू करने की तैयारी कर रही है। इसके माध्यम से प्रत्येक क्षेत्र की भूजल स्थिति के अनुरूप संरक्षण एवं पुनर्भरण के कार्यों को और अधिक लक्षित तथा परिणामोन्मुख बनाया जाएगा।

    मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि जल संरक्षण वर्तमान और आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य का संकल्प है। जनभागीदारी से छत्तीसगढ़ ने क्रिटिकल विकासखंडों की संख्या शून्य तक पहुंचाई है और अब इसी सामूहिक शक्ति से वर्ष 2030 तक प्रदेश के प्रत्येक विकासखंड को भूजल की दृष्टि से सुरक्षित बनाने के लक्ष्य की ओर आगे बढ़ेंगे।

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