इसी उद्देश्य से प्रदेशभर में चार जुलाई से 15 दिन का ‘जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार’ अभियान संचालित किया जा रहा है।
अभियान के पहले तीन दिनों में ही हजारों लोगों ने जिला, ब्लॉक और तहसील स्तर पर आयोजित विशेष शिविरों का लाभ उठाया।
मुख्यमंत्री के निर्देश पर आयोजित इन शिविरों में विभिन्न विभागों के अधिकारी-कर्मचारी और जनप्रतिनिधि मौके पर ही जन शिकायतों का निस्तारण कर रहे हैं।
लाभार्थियों को समाज कल्याण पेंशन, आयुष्मान कार्ड, राजस्व विभाग के प्रमाणपत्र, कृषि उपकरण, बीज तथा स्वास्थ्य परीक्षण के बाद आवश्यक चिकित्सा उपकरण भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
इसके साथ ही सड़क, बिजली, पेयजल और अन्य स्थानीय समस्याओं के समाधान के लिए भी संबंधित विभाग तत्काल कार्रवाई कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार चाहती है कि आम नागरिकों को अपनी समस्याओं के समाधान के लिए सरकारी कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें। विभागीय अधिकारी स्वयं लोगों तक पहुंचकर उनकी शिकायतों का त्वरित निस्तारण करें, यही इस अभियान का मूल उद्देश्य है
पिछले अभियान में पांच लाख से अधिक लोगों की भागीदारी
प्रदेश सरकार ने गत दिसंबर में भी 45 दिनों का ‘जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार’ अभियान चलाया था। इस दौरान प्रदेशभर में 681 शिविर आयोजित किए गए, जिनमें 5.33 लाख से अधिक नागरिकों ने भागीदारी की।
अभियान के दौरान करीब 33 हजार जन शिकायतों का त्वरित समाधान किया गया। प्रभावी जनसेवा और सुशासन के इस मॉडल को गवर्नेंस की उत्कृष्ट पहल के रूप में भी सराहा गया।
“राज्य सरकार का उद्देश्य है कि जनता को अपनी समस्याओं के समाधान के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर न लगाने पड़ें। जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार अभियान के माध्यम से प्रशासन स्वयं लोगों तक पहुंचकर उनकी समस्याओं का त्वरित समाधान कर रहा है। साथ ही पात्र लोगों को विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ भी एक ही स्थान पर उपलब्ध कराया जा रहा है। हमारी सरकार सरलीकरण, समाधान और संतुष्टि के मंत्र के साथ जनता की सेवा के लिए प्रतिबद्ध है।”
– पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री उत्तराखंड


