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    उत्तराखंड की चेनाप घाटी: जहां कुदरत सजाती है 400 से अधिक प्रजातियों के दुर्लभ फूलों की क्यारियां

    News DeskBy News DeskJune 19, 2026No Comments4 Mins Read
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    उत्तराखंड की चेनाप घाटी: जहां कुदरत सजाती है 400 से अधिक प्रजातियों के दुर्लभ फूलों की क्यारियां
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    उत्तराखंड के चमोली जिले में विश्व धरोहर फूलों की घाटी के अलावा एक और फूलों की घाटी भी मौजूद है, जिसे लोग चेनाप (चिनाप) घाटी के नाम से जानते हैं।

    समुद्रतल से करीब 13 हजार फीट की ऊंचाई पर सोना शिखर के पास बदरीनाथ वन प्रभाग के पांच वर्ग किमी क्षेत्रफल में फैली यह घाटी औली के ठीक सामने हिमाच्छादित चोटियों की तलहटी में स्थित है।

    जून से लेकर अक्टूबर तक यहां 400 से अधिक प्रजातियों के दुर्लभ हिमालयी फूल खिलते हैं। वर्ष 2025 में पर्यटन विभाग की ओर से इसे ‘ट्रेक आफ द ईयर’ घोषित किया गया था, इससे देश-विदेश के पर्यटकों को घाटी के बारे में जानने का मौका मिला।

    कुदरत ने सजाई हैं फूलों की क्यारियां

    चेनाप घाटी का खास आकर्षण हैं, यहां प्राकृतिक रूप से बनी एक से डेढ़ किमी लंबी राज्य पुष्प ब्रह्मकमल की क्यारियां, जिन्हें ‘फुलाना’ कहते हैं। इसके अलावा यहां दुर्लभ प्रजाति के वन्य जीवों और औषधीय जड़ी-बूटियों का भी समृद्ध भंडार मौजूद है।

    जुलाई से सितंबर के मध्य यहां खिलने वाले विभिन्न प्रजाति के फूलों की सुंदरता अभिभूत कर देने वाली होती है। सितंबर के बाद धीरे-धीरे फूल सूखने लगते हैं। हालांकि, हरियाली का आकर्षण फिर भी बना रहता है।

    2013 के बाद नजरों में आई घाटी

    चेनाप घाटी के लिए ब्लाक मुख्यालय जोशीमठ से दो रास्ते जाते हैं। इनमें एक रास्ते से चेनाप घाटी जाकर दूसरे से वापस लौटा जा सकता है। एक रास्ता थैंग गांव के घिवाणी तोक और दूसरा मेलारी टाप से होकर जाता है।

    मेलारी टाप से हिमालय की दर्जनों पर्वत शृंखलाओं का नजारा दिखता है। बदरीनाथ हाईवे पर बेनाकुली से खीरों व माकपाटा बुग्याल होते हुए भी घाटी पहुंचा जा सकता है।

    वर्ष 2013 की आपदा में जब फूलों की घाटी जाने वाला रास्ता ध्वस्त हो गया तो प्रकृति प्रेमी यहां पहुंचने लगे। इसके बाद ही लोगों ने इस घाटी के बारे में जाना।

    बंगाल के पर्यटकों की खास पसंद

    भले ही चेनाप घाटी के बारे में देश-दुनिया को खास जानकारी न हो, लेकिन 40 किमी लंबा बेनाकुली-खीरों-माकपाटा बुग्याल ट्रेक बंगाली पर्यटकों की पसंद माना जाता है।

    सुविधाएं सीमित होने के बावजूद बंगाल के पर्यटक प्रति वर्ष बड़ी संख्या में चेनाप घाटी की सैर को पहुंचते हैं।

    दरअसल, बंगाल के पर्यटक देवी नंदा के प्रति गहरी आस्था रखते हैं और माकपाटा बुग्याल चमोली जिले में हर साल आयोजित होने वाली नंदा देवी लोकजात का प्रमुख पड़ाव है।

    इसके अलावा बंगाल के पर्यटक भीड़भाड़ से दूर शांत वातावरण में समय बिताना पसंद करते हैं। यहां की अछूती सुंदरता प्रकृति की गोद में शांति और नेचर थेरेपी प्रदान करती है।

    घाटी के खास आकर्षण

    लाटू कुंड: चेनाप बुग्याल के बायीं ओर स्थित विशाल ताल को लाटू कुंड नाम से जाना जाता है।

    जाख भूत धारा (झरना): चेनाप बुग्याल के ठीक सामने काला डांग (ब्लैक स्टोन) नामक चोटी से निकलने वाले विशाल झरने को जाख भूत धारा कहते हैं।

    मस्क्वास्याणी: चेनाप बुग्याल के बायीं ओर ब्रह्मकमल की एक विशाल क्यारी है, जो जुलाई से लेकर सितंबर तक हरी-भरी रहती है। इसे मस्क्वास्याणी नाम दिया गया है।

    फुलाना बुग्याल: चेनाप बुग्याल से 400 मीटर दूर 130 डिग्री के ढलान पर दुर्लभ जड़ी-बूटी और फूलों की विशाल क्यारियों को फुलाना बुग्याल कहते हैं।

    काला डांग: चेनाप बुग्याल के ठीक सामने एक विशाल काले पत्थर की चोटी है, जो सितंबर तक हिमाच्छादित रहती है। काली होने के कारण यह चोटी बेहद आकर्षक नजर आती है।

    थैंग और धार खर्क गांव: विष्णु प्रयाग से ट्रेकिंग शुरू करने पर रास्ते में पड़ने वाले ये पारंपरिक गांव, गढ़वाल की लोक संस्कृति और जनजीवन को करीब से देखने का मौका देते हैं।

    स्वास्थ्य परीक्षण के बाद करें घाटी की सैर

    चेनाप घाटी जाने का सबसे अच्छा समय जून से सितंबर है। इस अवधि में घाटी की रंगत निखर उठती है। अधिक ऊंचाई पर होने के कारण यहां जबरदस्त ठंड पड़ती है और वर्षा होने पर तापमान भी गिर जाता है।

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