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    Home»राज्य»मध्यप्रदेश»मध्यप्रदेश में विरासत के संरक्षण के साथ किए जा रहे हैं विकास के तीव्र प्रयास : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
    मध्यप्रदेश

    मध्यप्रदेश में विरासत के संरक्षण के साथ किए जा रहे हैं विकास के तीव्र प्रयास : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    News DeskBy News DeskNovember 4, 2025No Comments7 Mins Read
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    मध्यप्रदेश में विरासत के संरक्षण के साथ किए जा रहे हैं विकास के तीव्र प्रयास : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
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    मध्यप्रदेश में विरासत के संरक्षण के साथ किए जा रहे हैं विकास के तीव्र प्रयास : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    सम्राट विक्रमादित्य महानाट्य का मंचन हमारी समृद्ध विरासत और गौरवशाली इतिहास को प्रस्तुत करने का माध्यम बना

    70वें मध्यप्रदेश स्थापना दिवस समारोह अभ्युदय मध्यप्रदेश के तीसरे व अंतिम दिन ड्रोन शो, महानाट्य सम्राट विक्रमादित्य और सुप्रसिद्ध गायिका स्नेहा शंकर की सुगम संगीत प्रस्तुति

    भोपाल

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश में विरासत के संरक्षण के साथ विकास के तीव्र प्रयास किए जा रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के संकल्प के अनुसार मध्यप्रदेश विरासत के संरक्षण में आगे है। विकास के अनूठे कदम उठाए गए हैं। सम्राट विक्रमादित्य महानाट्य का मंचन हमारी समृद्ध विरासत और गौरवशाली इतिहास को प्रस्तुत करने का माध्यम बना है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि उज्जैन ऐतिहासिक नगरी है, जहां भगवान कृष्ण ने सांदीपनि आश्रम में शिक्षा ग्रहण की। बाबा महाकाल की कृपा उज्जैन पर है। सम्राट विक्रमादित्य ने कलयुग में भी सतयुग जैसा और भगवान राम की तरह शासन किया। ज्ञान, न्याय, दानशीलता, शौर्य के गुणों से उन्हें महान शासक की संज्ञा मिली। उन्होंने विक्रम संवत को प्रारंभ किया।

    प्रदेश के विकास के लिए उठाए गए महत्वपूर्ण कदम

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि 2 वर्ष में प्रदेश के विकास के लिए अनूठे कदम उठाए गए हैं। मात्र डेढ़ वर्ष की अवधि में राज्य में 18 मेडिकल कॉलेज खुले हैं। आयुर्वैदिक मेडिकल कॉलेज खोलने में मध्यप्रदेश में सबसे आगे है। पीएम एक्सीलेंस कॉलेज सभी जिलों में हैं। राज्य के सभी जिलों में पुलिस बैंड के दल गठित किए गए। इसके लिए रिक्त पदों की पूर्ति की गई।

    आयोजनों को गरिमा मेय बनाने के लिए पुलिस बैंड का उपयोग व्यापक स्तर पर सराहा गया है। पुलिस बैंड के सदस्यों को आवश्यक प्रशिक्षण भी दिलवाया गया। हाल ही में सरदार वल्लभभाई पटेल की 150वीं जयंती पर केवड़िया (गुजरात) में हुए कार्यक्रम में मध्यप्रदेश के पुलिस बैंड दल का उपयोग किया गया। निश्चित ही यह मध्य प्रदेश के लिए गर्व और गौरव की बात है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राजा भोज भी प्रदेश के एक प्रतापी शासक थे। उनका शासन काल सम्राट विक्रमादित्य से लगभग 1000 साल बाद का रहा। भोपाल में स्थित विशाल सरोवर भोजताल कहलाता है। भारतीय संस्कृति के ऐसे पुरोधा और सुशासन देने वाले शासको की स्मृति में आयोजनों का सिलसिला चलता रहेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेशवासियों को मध्यप्रदेश स्थापना दिवस के कार्यक्रम "अभ्युदय मध्यप्रदेश" के समापन पर बधाई और शुभकामनाएं दी।

    विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव इस महानाट्य मंचन से जुड़े रहे हैं। संस्कृति में उनकी विशेष रूचि है। सम्राट विक्रमादित्य की खूबियों को नाटक के माध्यम से मंच पर लाने का कार्य करीब दो दशक से चल रहा है। भोपाल के निवासियों को पहली बार यह प्रस्तुति देखने को मिली है। उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव के सांस्कृतिक जगत में दिए जा रहे निर्देशन की सराहना की।

    कार्यक्रम में पूर्व राज्यपाल कप्तान सिंह सोलंकी, राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा, परिवहन, स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री मती संपतिया उईके, जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट, महिला बाल विकास मंत्री सु निर्मला भूरिया, ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री चैतन्य काश्यप, पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण, विमुक्त घुमन्तु और अर्द्धघुमन्तु कल्याण राज्य मंत्री मती कृष्णा गौर, कौशल विकास एवं रोजगार राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) गौतम टेटवाल, मछुआ कल्याण एवं मत्स्य राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) मंत्री नारायण सिंह पवार और लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री नरेन्द्र शिवाजी पटेल उपस्थित थे। इस अवसर पर भोपाल प्रवास पर आए उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री नंद गोपाल गुप्ता विशेष रूप से उपस्थित थे।

    देश के हृदय – मध्यप्रदेश ने अपने 70वें स्थापना दिवस पर “अभ्युदय मध्यप्रदेश” के रूप में संस्कृति, परंपरा और प्रगति का ऐसा संगम हुआ, जिससे हर दिल गर्व और उत्साह से भर गया। तीन दिनों तक चले इस भव्य समारोह में प्रदेश की लोक कलाओं, विविधताओं और विकास गाथा के मंचन ने बीते 70 वर्षों की यात्रा को सजीव कर दिया। सोमवार की शाम समारोह के समापन पर हर चेहरा मध्यप्रदेश के उज्ज्वल भविष्य की नई उम्मीदों से झिलमिला रहा था।

    स्थापना दिवस के उत्सव के तीसरे एवं अंतिम दिवस भी भव्य ड्रोन शो का प्रदर्शन किया गया। इस शो में 2000 ड्रोन ने एक साथ "विरासत से विकास'' पर केन्द्रित आसमान में आकृतियां बनाईं। इन आकृतियों में मध्यप्रदेश की समृद्ध विरासत के साथ सशक्त वर्तमान और उज्ज्वल भविष्य की आकृतियां आसमान को रोशन कर रही थीं। इसमें उद्योग और आधुनिकरण, रोजगार, विज्ञान, नीलकंठ आलोक, संस्कृति और विकास का संगम इत्यादि देखने को मिला।

    सोमवार की शाम सर्वप्रथम महानाट्य "सम्राट विक्रमादित्य" का भव्य मंचन हुआ। दर्शकों के उत्साह और उमंग को देखते हुए इसका पुनः प्रदर्शन किया गया। यह महानाट्य मध्यप्रदेश के वैभवशाली अतीत के उस प्रेरणा–पुरुष की गाथा प्रस्तुत करता है, जिन्होंने न्याय, नीति और पराक्रम के बल पर उज्जयिनी एवं मध्यप्रदेश की भूमि को स्वर्ण युग में पहुँचाया। मंचन में सम्राट विक्रमादित्य के अदम्य साहस, उनकी प्रजावत्सलता और विद्या-संस्कृति के प्रति उनके समर्पण को सजीव रूप में प्रदर्शित किया गया।

    भव्य संगीत, आकर्षक सेट, ऊंट, हाथी, घोड़े, पालकियों ने दर्शकों को उसी युग में पहुंचा दिया। कलाकारों के उत्कृष्ट अभिनय ने दर्शकों को भाव विभोर कर दिया। इस महानाट्य की प्रस्तुति उज्जैन की संस्था विशाला सांस्कृतिक एवं लोकहित समिति द्वारा दी गई, जिसका निर्देशन संजीव मालवीय ने किया है। तीन अलग स्टेज पर अत्याधुनिक ग्राफिक, आश्रम एवं जंगल के भव्य सेट के साथ ही भव्य महाकाल मंदिर के प्रतिरूप सेट और 150 कलाकारों ने महानाट्य को जीवंत बना दिया।

    विक्रमादित्य केवल योद्धा नहीं, बल्कि न्यायप्रिय और प्रजावत्सल शासक थे। “बेताल पच्चीसी” और “सिंहासन बत्तीसी” उनकी विवेकपूर्ण न्याय कथाओं से परिपूर्ण हैं। उनके दरबार में कालिदास, वराहमिहिर, धन्वंतरि जैसे नवरत्न विद्या और संस्कृति के प्रतीक बने। यह युग भारत के विज्ञान, साहित्य और खगोल की प्राचीन समृद्धि का प्रमाण है।

    स्वर की कोमलता ने हृदय को छुआ

    महानाट्य “सम्राट विक्रमादित्य” की यादगार और भव्य प्रस्तुति के बाद सुप्रसिद्ध गायिका सु स्नेहा शंकर एवं साथी, मुंबई द्वारा सुगम संगीत की मनमोहक प्रस्तुति दी गई। उनकी गायकी में ऐसा सुरीलापन और आत्मीयता झलकी, मानो हर सुर में एक कहानी, हर ताल में एक भावना बसी हो। मधुर स्वर लहरियों ने वातावरण को भावनाओं के सागर में डुबो दिया। श्रोता मंत्रमुग्ध होकर सुनते रहे – कभी स्वर की कोमलता ने हृदय को छुआ, तो कभी लय की गहराई ने मन को आल्हादित कर दिया। उनकी आवाज में था संगीत का जादू, जिसमें संवेदना, समर्पण और सहजता का अद्भुत संगम था – एक ऐसी प्रस्तुति जो देर तक श्रोताओं के मन में गूंजती रही।

    अहिराई नृत्य में अहीर नायकों की गाई जाती हैं वीर गाथाएं

    सायंकालीन प्रस्तुतियों से पूर्व अपरान्ह 3 बजे से मध्यप्रदेश के लोक एवं जनजातीय नृत्यों की प्रस्तुति हुई। इसमें संतोष यादव एवं साथी, सीधी द्वारा अहिराई लाठी नृत्य की प्रस्तुति दी गई। बघेलखंड में यादव समुदाय द्वारा ‘अहिराई नृत्य’ अहीर नायकों की वीर गाथाएँ गाई जाती है। वहीं, शिशुपाल सिंह एवं साथी, टीकमगढ़ द्वारा मोनिया नृत्य प्रस्तुत किया गया। बुंदेलखंड का यह लोकनृत्य कार्तिक माह में अमावस्या से पूर्णिमा तक किया जाता है। सु अनुजा जोशी एवं साथी, खंडवा द्वारा गणगौर नृत्य की प्रस्तुति दी गई। गणगौर निमाड़ी जन-जीवन का गीति काव्य है। सु स्वाति उखले एवं साथी, उज्जैन द्वारा मटकी नृत्य की प्रस्तुति दी। विभिन्न अवसरों पर मालवा के गाँव की महिलाएँ मटकी नाच करती है। कार्यक्रम में अरविंद यादव एवं साथी, सागर द्वारा बधाई नृत्य की प्रस्तुति दी गई। बुन्देलखण्ड अंचल में जन्म विवाह और तीज-त्यौहारों पर बधाई नृत्य किया जाता है। अगले क्रम में लालबहादुर घासी एवं साथी द्वारा घसियाबाजा नृत्य की प्रस्तुति दी गई। सरगुजा जिले के सुदूर ग्रामीण अँचल में रहने वाले विशेष कर घासी जाति का यह परम्परागत नृत्य एवं जीविका का साधन है। इसके बाद संदीप उइके एवं साथी, सिवनी द्वारा गोण्ड जनजातीय नृत्य गुन्नूरसाई की प्रस्तुति दी गई।

     

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