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    मध्यप्रदेश

    मंत्रियों को अब भी रास नहीं आ रही ई-फाइलिंग

    News DeskBy News DeskJanuary 13, 2025No Comments4 Mins Read
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    मंत्रियों को अब भी रास नहीं आ रही ई-फाइलिंग
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    भोपाल। सरकार व शासन का जहां पूरा जोर मंत्रालय में ई- फाईलिंग सिस्टम पर बना हुआ है, वहीं इस मामले में प्रदेश के मंत्री और उनके स्टाफ में पदस्थ कर्मचारी रुचि नहीं ले रहे हैं। यही वजह है कि इस सिस्टम के मंत्रालय में लागू होने के बाद भी अफसरों को मैनूअली फाइल तैयार करानी पड़ रही है। इसकी वजह है मंत्रियों द्वारा ई फाइलिंग सिस्टम की जगह अब भी मैनुअली रुप से काम करना। दरअसल मंत्रालय में निचले स्तर से लेकर एएसीएस स्तर तक पूरा काम ई- फाईलिंग सिस्टम पर होता है, लेकिन जैसे ही मंत्रियों की बारी आती है तो फिर ई- फाईलिंग सिस्टम की जगह उन्हें मैनूअली रुप से तैयार करना पड़ता है। इसके बाद फाइल मंत्रालय से मंत्री के आवास पर पहुंचाई जाती है। उल्लेखनीय है कि मंत्रालय में एक जनवरी से ई-फाइल सिस्टम लागू हो गया है।
    इसके बाद से ही सभी विभागों में फाइलों का काम डिजिटली होने लगा है। इससे समय के साथ ही कागजों का खर्च बचने लगा है, लेकिन मंत्रियों के इस प्लेटफार्म पर काम नहीं करने की वजह से अधिकारियों को कंप्यूटर से ई-फाइल के प्रिंट निकलवाने पड़ रहे हैं। मंत्रियों से फाइल मंजूर होनेू के बाद एक बार फिर से उसे ई -फाईलिंग सिस्टम में डालना पड़ रहा है। इसके लिए फाइल के मुख्य पृष्ठ को स्कैन करके फिर से फाइल डिजिटली आगे बढ़ाई जाती है। अहम बात यह है कि इस तरह की स्थिति तब बनी हुई है, जबकि मंत्रियों के निजी स्टाफ में शामिल कर्मचारियों को ई-ऑफिस सिस्टम का प्रशिक्षण भी दिया जा चुका है। मंत्रियों के ई-ऑफिस सिस्टम नहीं अपनाने से इसे लागू करने का मसकद फिलहाल पूरा होता नजर नहीं आ रहा है। दरअसल, सरकार ने प्रशासनिक कामकाज में तेजी एवं पारदर्शिता लाने के मकसद से शासकीय कार्यालयों में ई-ऑफिस सिस्टम तीन चरणों में लागू किए जाने का निर्णय लिया है। पहले चरण में एक जनवरी से इसे मंत्रालय में लागू किया जा चुका है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इसका शुभारंभ किया था। दूसरे चरण में सभी विभागाध्यक्ष तीन चरणों में लागू होना है ई-ऑफिस सिस्टम, मंत्रालय के बाद विभागाध्यक्ष कार्यालयों में और फिर जिलों के सरकारी कार्यालयों में इसे लागू किया जाएगा। तीसरे चरण में सभी जिला स्तर के सरकारी कार्यालयों में इसे लागू किया जाना है।  खास बात यह है कि मंत्रालय में ई-ऑफिस सिस्टम लागू होने के बाद फाइले जहां ऑनलाइन एक से दूसरे कर्मचारी/अधिकारी तक ऑनलाइन मूव कर रही हैं, वहीं कुछ फाइलें मैनुअली भी आगे बढ़ाई जा रही है। इससे अब भी अधिकारी-कर्मचारियों की टेबलों पर फाइलों का अंबार लगना शुरु हो गया है। इससे कई बार ऐसी स्थिति बन जाती है कि अधिकारी जिस फाइल को मैनुअली आगे बढ़ा चुके होते हैं, वह फाइल डिजिटली उनके पास  आ जाती है। सामान्य प्रशासन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि ई-ऑफिस सिस्टम लागू हुए अभी कुछ ही दिन हुए हैं। शुरुआत में कुछ दिक्कतें सामने आना स्वभाविक है, लेकिन धीरे-धीरे स्थिति सामान्य हो जाएगी। इसमें कम से कम छह माह का समय लग सकता है।

    एक बार फिर से प्रशिक्षण की तैयारी
    मंत्रालय के अधिकारी-कर्मचारियों को ई-ऑफिस सिस्टम का प्रशिक्षण एक बार दिया जा चुका है। अब इसके लागू होने से एक बार फिर से इसका प्रशिक्षण देने की तैयारी है, जिससे की काम करने में कोई परेशानी नही आए। जैसे ही आला अफसरों से स्वीकृति मिलेगी फिर से प्रशिक्षण देने का काम  शुरु कर दिया जाएगा।

    यह है इससे फायदा
    – मंत्रालय में फाइलों पर काम होने में तेजी आएगी। इसकी वजह है हर फाइल की लोकेशन अपडेट रहेगी।
    – ई-ऑफिस सिस्टम से हर स्तर पर जवाबदेही तय हो जाएगी। इस सिस्टम में लिपिक से लेकर मुख्य सचिव तक फाइल निपटाने की समय-सीमा तय है। फाइल समय पर नहीं करने के लिए कारण भी बताना होगा।
    – बिना किसी कारण के फाइल को नहीं रोका जा सकेगा। इसके बाद भी फाइलें लंबित रहती है, तो संबंधितों पर कार्रवाई की जा सकेगी।
    – ई-ऑफिस सिस्टम में हर फाइल को ट्रेस करना आसान है।
    – इमरजेंसी में एक ऑफिस से दूसरे ऑफिस में अधिकारियों को फाइल लेकर आना जाना नहीं पड़ेगा। एक क्लिक पर फाइल सामने स्क्रीन पर मिल जाएगी।

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