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    छत्तीसगढ़

    बंद खदानों में केज कल्चर तकनीक से मछली पालन बना रोजगार और आत्मनिर्भरता का नया जरिया

    News DeskBy News DeskJanuary 1, 2025No Comments2 Mins Read
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    बंद खदानों में केज कल्चर तकनीक से मछली पालन बना रोजगार और आत्मनिर्भरता का नया जरिया
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    रायपुर

    राजनांदगांव जिले के बंद पड़ी खदानों को आजीविका के लिए उपयोगी बनाते हुए प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत केज कल्चर तकनीक से मछली पालन का कार्य तेजी से लोकप्रिय और फायदेमंद साबित हो रहा है। यह नवाचार न केवल मत्स्य पालकों के लिए आर्थिक रूप से फायदेमंद साबित हुआ है, बल्कि 150 से अधिक स्थानीय बेरोजगार युवाओं और महिलाओं के लिए रोजगार का नया जरिया भी बन गया है।

    जिले के ग्राम जोरातराई में बंद पड़ी खदानों को जलस्रोत के रूप में उपयोग करते हुए 9.72 करोड़ रुपए की लागत से 18 इकाइयों में कुल 324 केज लगाए गए हैं। प्रत्येक केज इकाई की लागत 3 लाख रुपए है, जिसमें से 60 प्रतिशत अनुदान के रूप में 5.83 करोड़ रुपए की राशि प्रदान की गई है। केज कल्चर, जिसे नेट पेन कल्चर भी कहा जाता है, जलाशय में फ्लोटिंग केज यूनिट स्थापित करने की एक आधुनिक तकनीक है। इसमें एक केज यूनिट में चार बाड़े होते हैं, जहां उंगली के आकार की मछलियों को पाला जाता है, जो  पांच माह में लगभग एक से सवा किलो वजन की हो जाती है। इस तकनीक में तिलापिया और पंगेसियस जैसी मछलियों का पालन किया जा रहा है। प्रत्येक केज से 2.5 से 3 टन तक मछली उत्पादन होता है, जिससे 6 से 8 हजार रुपए की मासिक आमदनी होती है।

    ग्राम मुढ़ीपार स्टेशन पारा की श्रीमती पूर्णिमा साहू ने बताया कि जय मां संतोष महिला स्वसहायता समूह के माध्यम से केज कल्चर तकनीक से जुड़ने के बाद उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ है। समूह की महिलाओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का आभार प्रकट किया है। जोरातराई की खदानों में 8 लाख से अधिक मछलियां पाली जा रही हैं। यह तकनीक न केवल मछलियों की तेज वृद्धि और स्वास्थ्य के लिए उपयुक्त है, बल्कि संक्रमण का खतरा भी कम रहता है। मत्स्यपालक अपनी जरूरत के अनुसार केज से मछलियां निकाल सकते हैं।

    राज्य सरकार की इस पहल ने बेरोजगार युवाओं और महिलाओं को रोजगार के साधन उपलब्ध कराए हैं। मत्स्य पालन की इस नवीन तकनीक से अब ताजी और स्थानीय मछलियां बाजार में उपलब्ध हो रही हैं। केज कल्चर तकनीक ने जिले में मछली उत्पादन के नए आयाम स्थापित किए हैं। जलाशयों और बंद खदानों के जलस्रोतों का यह उपयोग स्वरोजगार और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

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