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    मध्यप्रदेश

    सागर की लाखा बंजारा झील ने संरक्षण और सौंदर्यीकरण से प्रदेश में बनाई अनूठी पहचान

    News DeskBy News DeskDecember 22, 2024No Comments4 Mins Read
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    सागर की लाखा बंजारा झील ने संरक्षण और सौंदर्यीकरण से प्रदेश में बनाई अनूठी पहचान
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    भोपाल : सागर शहर की ऐतिहासिक धरोहर लाखा बंजारा झील से सागर शहर की पहचान देश और प्रदेशभर में रही है। यह झील सागर शहर का प्रमुख जल स्त्रोत भी है। नगरीय प्रशासन एवं आवास विभाग के स्मार्ट सिटी मिशन में लाखा बंजारा झील का संरक्षण और सौंदर्यीकरण कार्य 111 करोड़ 33 लाख रूपये की लागत से किया गया है। सागर शहर की यह ऐतिहासिक झील सागर स्मार्ट सिटी लिमिटेड द्वारा कायाकल्प के बाद अपने इस रोमांचित करने वाले नये स्वरूप में शहरवासियों के सामने उभरकर सामने आयी है। झील किनारे मंदिरों में जलगंगा आरती जैसा आयोजन नागरिकों में धार्मिक और आध्यात्मिक भावना को भी बढ़ाएगी। दूसरी ओर अत्याधुनिक खेल और मनोरंजन जैसी सुविधाएं पर्यटकों को मानसिक एवं शारीरिक सुकून प्रदान करेंगी। पर्यटकों के आने से रोजगार और आय के साधन बढ़ेंगे।

    झील को स्वच्छ बनाने 5.5 किलोमीटर पाइप लाइन बिछाकर की गई नाला टेपिंग

    स्मार्ट सिटी परियोजना में 400 एकड़ विशाल क्षेत्र में फैली लाखा बंजारा झील में वैज्ञानिक और तकनीकी रूप से कार्य किया गया है। झील के संरक्षण के लिये हाइड्रोलिक सर्वेक्षण किया गया है। सर्वेक्षण के जरिये झील के विभिन्न स्थलों पर पानी की गहराई, झील की भौतिक, रासायनिक और जैविक विशेषताओं की जानकारी एकत्र की गई। झील के जैव विविधता का ध्यान में रखते हुए झील के जल की गुणवत्ता की लेब में जांच की गई। लेब रिपोर्ट में झील के जल का टर्बिडिटी मान 82 जेटीयू से अधिक पाया गया, जो कि 2.5 जेटीयू से अधिक नहीं होना चाहिए। इस वजह से झील के संरक्षण के लिये झील के पानी को पूरी तरह खाली कर ग्रेविटी के माध्यम से झील के संरक्षण का कार्य शुरू किया गया। झील की परिधि से जुड़े 4 बड़े और 37 छोटे नालों सहित कुल 41 नालों से निकलने वाले दूषित पानी को झील में मिलने से रोका गया। इसके लिये झील परिधि में 5.5 किलोमीटर पाइप लाइन बिछाकर नाला टेपिंग का कार्य किया गया। इस प्रकार करीब 2 एमएलडी ग्रेवॉटर सीवरेज गंदे पानी पर रोक लगाई गई है।

    दूषित पानी के उपयोग के लिये ट्रीटमेंट प्लांट

    झील के आसपास गंदे पानी को पुन: उपयोग बनाने के लिये मोंगा बधान की ओर 4 एमएलडी क्षमता का वेस्ट वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित किया गया है। ट्रीटमेंट किये गये पानी का उपयोग झील किनारे ड्रिप इरीगेशन लाइन द्वारा पौधों की सिंचाई के लिये किये जाने की व्यवस्था की गई है। वॉटर ट्रीटमेंट से प्राप्त दूषित सामग्री को खाद के रूप में उपयोग किये जाने की व्यवस्था की गई है। झील को खाली कर सुखाने की प्रक्रिया में 8 लाख घनमीटर सिल्ट को झील से बाहर निकाला गया। इससे झील की गहराई बढ़ने के साथ ही भू-जल संरक्षण क्षमता में वृद्धि हुई है। इस कारण से झील के आसपास भूमिगत पानी के स्तर में भी बढ़ोत्तरी हुई है।

    झील के सौंदर्यीकरण का कार्य

    झील के किनारे फ्लेग और कोबल स्टोन लगाकर करीब 5 किलोमीटर लंबे व्यवस्थित पाथ-वे का निर्माण किया गया है। झील के चारों तरफ सुंदर प्लांटेशन और आकर्षक कलाकृतियों को स्थापित किया गया है। झील के किनारे पाथ-वे बनने से शहर के नागरिक मॉर्निंग और इवनिंग वॉक कर सकेंगे। बारिश के दौरान झील का जल स्तर बढ़ने पर इसे निर्धारित लेवल पर लाने के लिये स्लूस गेट बनाये गये हैं। मोंगा बांध पर पेडेस्ट्रीयन ब्रिज का निर्माण भी किया गया है। चकराघाट से गणेशघाट तक 400 मीटर के विशाल घाट सहित 8 घाटों का लाल पत्थर से पुनर्निर्माण किया गया है।

    प्रतिमा की स्थापना

    सागर की इस विशाल झील के निर्माण करने वाले लाखा बंजारा की प्रतिमा शहर के दीनदयाल चौक के पास स्थापित की गई है। झील को चारों ओर से सुरक्षित बनाने के लिये लोहे की ऊँची ग्रिल लगाकर बाउंड्री वॉल का निर्माण किया गया है। रात्रि के समय झील के नजारे को आकर्षक और सुरक्षित बनाने के लिये आकर्षक लाइटिंग और पाथ-वे पर स्ट्रीट लाइट से हाई मास लाइट स्थापित की गई है। झील के सौंदर्यीकरण में इसके किनारे पर अलग-अलग थीम पर विकास कार्य किया गया है। गणेशघाट से चकराघाट तक प्राचीन मंदिरों की श्रृंखला और सागर के ऐतिहासिक किले की बाहरी दीवारों को पेंटिंग करके आकर्षक बनाया गया है। लाल पत्थर से 4 बड़ी छतरियों और 9 नवग्रह मंडप का निर्माण किया गया है। झील के किनारे स्पोर्टस् जोन का भी निर्माण किया गया है।

    जल विहार का विकास

    झील के मुख्य प्रवेश द्वार पर मोंगा बंधान और मनोरंजन सुविधाएं विकसित की गई हैं। जल विहार के लिये नागरिकों के लिये पैडलबोट, मोटर बोट और विशाल क्रूज की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। झील के किनारे परंपरागत खाने के फूड जोन बनाये गये हैं।

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