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    मध्यप्रदेश

    विभागों की गाइड लाइन बढ़ा रही है परेशानी

    News DeskBy News DeskNovember 12, 2024No Comments4 Mins Read
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    विभागों की गाइड लाइन बढ़ा रही है परेशानी
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    ठेकेदार एडवांस लेकर भागे, परियोजनाएं अधर में

    भोपाल । प्रदेश में विभिन्न योजनाओं-परियोजनाओं को लेकर विभागों द्वारा जो गाइड लाइन बनाई गई है, वह ठेकेदारों की परेशानी बढ़ा रही है। इसका असर यह हो रहा है कि कई परियोजनाओं में काम कर रहे ठेकेदार एडवांस लेकर भाग गए हैं। इससे काम अधर में लटका हुआ है। जानकारों का कहना है कि सरकारी परियोजनाओं में काम करने वाले ठेकेदारों को विभागों के कई तरह के कायदे-कानूनों का पालन करना पड़ता है, इसलिए ठेकेदार एडवांस लेने के बावजुद भी काम नहीं कर रहे हैं।  प्रमुख अभियंता जल संसाधन विभाग शिरीष मिश्रा का कहना है कि ठेकेदारों को मोबिलाइजेशन एडवांस देने के लिए सरकार ने पहली बार नियम लागू किए हैं। पीडब्ल्यूडी- पीएचई आदि में 10 प्रतिशत तक अग्रिम देने का नियम हैं, लेकिन जल संसाधन विभाग में केवल 2.50 प्रतिशत यानि वाई प्रतिशत ही देने का प्रावधान है। प्रेशराइज्ड प्रोजेक्ट में जरूर 70 से प्रतिशत एडवांस ठेकेदारों को किया जा सकता है।

    एडवांस 10 प्रतिशत तक दिए जाने का प्रावधान 
    ठेकेदारों को मोबिलाइजेशन एडवांस देने के लिए सरकार ने जो नियम लागू किए हैं, उसके तहत जल संसाधन विभाग भी अब ठेकेदारों को मोबिलाइजेशन के रूप में सिर्फ 2.50 प्रतिशत राशि एडवांस में दे सकेगा। जबकि पीडब्ल्यूडी सहित अन्य विभागों में ठेकेदारों को एडवांस 10 प्रतिशत तक दिए जाने का प्रावधान है। एरिगेशन यह मोबिलाइजेशन सिर्फ टर्न की पद्धति पर ठेका लेने वाले ठेकेदारों को 110 प्रतिशत गारंटी देने पर 50 करोड़ से अधिक के कामों पर देगा। उधर, भोपाल सहित कई आवासीय प्रोजेक्ट में एडवांस लेकर ठेकेदार भाग गए हैं। मप्र में निर्मित होने वाली अधिकांश बड़ी-छोटी सिंचाई परियोजनाओं में अब पाइप लाइन का इस्तेमाल होने लगा है। इसके पहले निर्मित सिंचाई प्रोजेक्ट नहर आधारित होते थे, जिनके माध्यम से सिंचाई के लिए खेतों तक पानी पहुंचाया जाता था, लेकिन अब प्रेशराइज्ड यानि पाइप लाइन के जरिए पानी खेतों तक जाने लगा है। इससे सीवेज नहीं होने से पानी की बचत होने लगी है और इसका उपयोग पीने के लिए भी किया जाने लगा है। वैसे पाइप लाइन आधारित सिंचाई प्रोजेक्ट में विभाग ठेकेदारों को 70 से 80 प्रतिशत तक राशि एडवांस में देता है। यह राशि एडवांस में देने के कारण ही विवाद और गड़बडिय़ों की शिकायतें ज्यादा मिल रही है। खासकर छिंदवाड़ा काम्प्लेक्स से लेकर रीवा-सतना, शहडोल-बालाघाट आदि के मामले विधानसभा में भी उठ चुके हैं। एडवांस भुगतान बाद ठेकेदार द्वारा प्रस्तुत किए गए पहले बिल से मोबिलाइजेशन एग्रिम की वसूली तुरंत शुरू हो जाएगी और प्रत्येक चालू बिल से बिल राशि के 5 प्रतिशत की दर से वसूला जाएगा। यदि अग्रिम भुगतान की उमुली निर्धारित अनुबंध अवधि के 50 प्रतिशत या व्यय के 50 प्रतिशत आगे जारी रहती है, तो बीजी को भुनाया जाएगा। मोबिलाइजेशन एडवांस के लिए ठेकेदार द्वारा प्रस्तुत बीजी को अग्रिम की पूरी राशि की वसूली के बाद जारी किया जाएगा।

    कई प्रोजेक्ट आधे-अधूरे
    पीडब्ल्यूडी, पीएचई, नगरीय विकास एवं आवास आदि विभागों में ठेकेदार द्वारा ठेका लेने के तत्काल बाद मशीनरी, उपकरण, मटेरियल की खरीदी के लिए दो किश्तों में 5-5 प्रतिशत एडवांस राशि दिए जाने का नियम लागू है। उक्त राशि को ठेकेदार के बिल से वसूला जाता है। लेकिन प्रदेश में कई ठेकेदार एडवांस लेकर भाग गए हैं, जिसके कारण वह प्रोजेक्ट पूरा नहीं हो पाया है। खासकर नगरीय प्रशासन विभाग द्वारा निर्मित कराए जा रहे शहरी पीएम आवास योजना के कई प्रोजेक्ट में ठेकेदार एडवांस लेकर रफूचक्कर हो गए हैं, जिससे आवास के लिए पूरी राशि जमा करने वाले लोगों को परेशानी उठानी पड़ रही है, क्योंकि वह आवासीय प्रोजेक्ट करीब दो साल से आधे- -अधूरे पड़े हुए हैं। सबसे ज्यादा स्थिति भोपाल में खराब है। जल संसाधन विभाग द्वारा जारी नियमों में टर्नकी अनुबंधों के तहत ठेका लेने वाले ठेकेदार या कंपनी को एक बार व्याज मुक्त मोबिलाइजेशन अग्रिम देगा, जो अग्रिम राशि के विरुद्ध 110 प्रतिशत राशि की बिना शर्त बैंक गारंटी पर ढाई प्रतिशत (2.50), अनुबंध मूल्य का, या 50 करोड़ रुपए जो भी कम हो, से अधिक नहीं होगा। जो नियोका को स्वीकार मप्र में स्थित किसी राष्ट्रीयकृत या अनुसचित (सहकारी बैंक को छोड़ कर बैंक की शाखा द्वारा जारी किया जाएगा। यदि ठेकेदार द्वारा मांग की जाती है, तो समझौते पर हस्ताक्षर करने के बाद मोबिलाइजेशन एडवांस स्वीकार्य होगा।

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