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    छत्तीसगढ़

    आदिवासियों का विकास छत्तीसगढ़ सरकार की प्राथमिकता

    News DeskBy News DeskNovember 2, 2024No Comments8 Mins Read
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    आदिवासियों का विकास छत्तीसगढ़ सरकार की प्राथमिकता
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    रायपुर : विशेष लेख : आदिवासियों का विकास छत्तीसगढ़ सरकार की प्राथमिकता

    – जे.एल.दरियो, अपर संचालक

    छत्तीसगढ़ में विष्णु देव साय सरकार ने आदिवासी समुदाय की विकास में भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार जैसे मुददों को वरीयता दी है। आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र में समग्र विकास का स्वप्न साकार हो रहा है। प्रदेश के दूरस्थ इलाकों में जिस तरह स्वास्थ्य, सड़क, संचार और सुरक्षा नेटवर्क को मजबूती दी जा रही है, उसका सर्वाधिक लाभ आदिवासी वर्ग को मिल रहा है। इससे जहां आदिवासी समाज के जीवन स्तर में गुणवत्ता का संचार हो रहा है, वहीं सुशासन की इस बयार से प्रदेश में वामपंथी उग्रवाद की समस्या को परास्त करने में भी मदद मिल रही है। इन इलाको में केन्द्र सरकार द्वारा चलाई जा रही पी.एम.जनमन योजना और राज्य सरकार की नियद नेल्ला नार योजना गेम चेंजर साबित हो रही है।

           छत्तीसगढ़ की लगभग 3 करोड़ आबादी में एक तिहाई जनसंख्या आदिवासी समुदाय की है। इन समुदायों के पिछड़ेपन को दूर करने के लिए साय सरकार द्वारा शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और सुरक्षा पर विशेष फोकस किया गया है। इसके अलावा केन्द्र और राज्य सरकार की योजनाओं को उन तक पहुंचाने के लिए नए-नए प्रयास किए जा रहे हैं। आदिवासी समुदाय के सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक उत्थान के लिए चलाई जा रही योजनाओं से नया वातावरण बन रहा है। साय सरकार ने पिछले 10 माह में इन सभी मुददों पर काम किया है। मुददा चाहे आदिवासी समुदाय के आवास, पेयजल, विद्युत या सड़क सहित सभी बुनियादी जरूरतों पर तेजी से काम किया जा रहा है।

           राज्य शासन की नियद नेल्ला नार (आपका अच्छा गांव) योजना जनकल्याण का अभिनव उपक्रम साबित हो रही है। इस योजना के अंतर्गत माओवाद प्रभावित क्षेत्रों में स्थापित नए कैम्पों के आसपास के 5 किमी के दायरे में आने वाले 96 गांवों का चयन कर शासन के 17 विभागों की 53 योजनाओं और 28 सामुदायिक सुविधाओं के तहत आवास, अस्पताल, पानी, बिजली, पुल-पुलिया, स्कूल इत्यादि मूलभूत संसाधन उपलब्ध कराए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री की पहल पर छत्तीसगढ़ के माओवादी आतंक प्रभावित जिलों के विद्यार्थियों को तकनीकी एवं व्यावसायिक शिक्षा के लिए ब्याज रहित ऋण मिलेगा। शेष जिलों के विद्यार्थियों को 1 प्रतिशत ब्याज दर पर ऋण प्रदान किया जाएगा। ब्याज अनुदान के लिए शिक्षा ऋण की अधिकतम सीमा 4 लाख रूपए रखी गई है।

           आदिवासी क्षेत्रों में वामपंथी उग्रवाद को रोकने के लिए सुरक्षा और विकास को मूल मंत्र बनाया है, इसके सार्थक परिणाम दिख रहे हैं। इन इलाकों में रहने वाले लोगों को शासकीय योजनाओं का लाभ दिलाने के साथ-साथ उन्हें सभी जरूरी सुविधाएं भी दी जा रही है। बीते 10 महीनों के दौरान मुठभेड़ों में 195 माओवादियों को ढेर किया गया। 34 फारवर्ड सुरक्षा कैम्पों की स्थापना की गई। निकट भविष्य में दक्षिण बस्तर एवं माड़ में रि-डिप्लायमेंट द्वारा 30 नए कैम्पों की स्थापना प्रस्तावित है।

           राज्य में गरीब परिवारों को शहीद वीर नारायण सिंह विशेष स्वास्थ्य सहायता योजना के तहत 20 लाख रूपए की राशि गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। स्वास्थ्य से समृद्धि की राह पर आगे बढ़ते हुए छत्तीसगढ़ सरकार आदिवासी क्षेत्रों के अस्पतालों को सर्वसुविधायुक्त बनाया जा रहा है। छत्तीसगढ़ सरकार ने 68 लाख गरीब परिवारों को 05 साल तक मुफ्त राशन देने का निर्णय लिया है, इसके लिए बजट में 3400 करोड़ रुपए का प्रावधान है। इसका लाभ आदिवासी समुदाय को भी मिल रहा है।  

           केन्द्र सरकार द्वारा शुरू किए गए पीएम जनमन योजना के तहत आदिवासी बसाहटों में मूलभूत सुविधा उपलब्ध कराने के लिए तेजी काम हो रहा हैं। राज्य में विशेष रूप से पिछड़ी जनजाति समूह के परिवारों के विकास हेतु 20 करोड़ का प्रावधान है। इन क्षेत्रों में 57 मोबाईल मेडिकल यूनिट के संचालन हेतु अनुपूरक में 2 करोड़ 72 लाख का प्रावधान है।  पीव्हीटीजी के विद्युतीकरण हेतु 3 करोड़ 76 लाख का अतिरिक्त प्रावधान है।

        छत्तीसगढ़ में आदिवासी समुदाय की बसाहट ज्यादातर वनांचल क्षेत्रों में है। इन क्षेत्रों में सड़क, नेटवर्क बढ़ाया जा रहा है। केन्द्र सरकार द्वारा भी भारत माला प्रोजेक्ट के तहत रायपुर से विशाखापट्नम तक ईकोनॉमी कारिडोर बनाया जा रहा है। इसका सीधा फायदा भी आदिवासी इलाकों को मिलेगा। केन्द्र सरकार द्वारा नगर नार में देश का सबसे बड़ा इस्पात संयंत्र भी शुरू किया गया है, इससे बस्तर अंचल के विकास को नई गति मिली है।

           राज्य के आदिवासी क्षेत्रों और अयोध्या धाम तक सीधी कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए मुख्यमंत्री ने रायगढ़-धरमजयगढ़-मैनपाट-अंबिकापुर-उत्तरप्रदेश सीमा तक कुल 282 किमी तक के मार्ग को राष्ट्रीय राजमार्ग घोषित करने की मांग की है। यह मार्ग प्रदेश के चार जिलों से होकर गुजरता है एवं धार्मिक नगरी अयोध्या से छत्तीसगढ़ राज्य को जोड़ने वाला मुख्य मार्ग है। इस मार्ग के लिए भारत सरकार से हरी झण्डी मिल गई है।

    केन्द्र सरकार द्वारा आदिवासी समाज को प्राथमिकता जनजातीय परिवारों के सामाजिक आर्थिक विकास को गति देने के लिए प्रधानमंत्री जनजातीय उन्नत ग्राम अभियान शुरू किया जा रहा है। इस योजना से देशभर के इसमें 63,000 गावों के 5 करोड़ जनजातीय लोग लाभार्थी होंगे। छत्तीसगढ़ की जनसंख्या में लगभग 30 प्रतिशत अनुपात आदिवासी समाज को सीधा लाभ मिलेगा। इसी प्रकार कृषि बजट में वृद्धि खेती-किसानी से जुड़े क्षेत्रों के लिए 1.52 लाख करोड़ का आवंटन किया गया है। किसानों की खेतीबाड़ी के लिए 32 कृषि और बागवानी फसलों की नई उच्च पैदावार वाली और जलवायु अनुकूल किस्म जारी की गई है। प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए 10,000 जैव आदान संसाधन केंद्र स्थापित किए जाएगा, इसका लाभ भी राज्य के आदिवासी बहुल इलाकों को मिलेगा।  

        आदिवासी बहुल इलाकों में तेन्दू के वृक्षों की बहुतायत है। तेन्दूपत्ता संग्रहण से बड़ी संख्या में समुदाय के लोगों को रोजगार मिलता है। इसको देखते हुए राज्य सरकार ने तेन्दूपत्ता संग्रहरण की दर 4000 से बढ़ाकर 5500 रूपए कर दिया है। तेंदूपत्ता संग्रहण कार्यों से लगभग 12 लाख से अधिक परिवार लाभान्वित हुए हैं। जल्द ही सरकार तेन्दूपत्ता संग्रहकों के लिए चरण पदुका वितरण योजना भी शुरू करने जा रही है।

           राज्य सरकार द्वारा 36 कॉलेजों के भवन-छात्रावास निर्माण के लिए 131 करोड़ 52 लाख रूपए मंजूर किए गए है। इससे प्रदेश के 36 कॉलेजों के इंफ्रास्ट्रक्चर सुदृढ़ होंगे तथा शैक्षणिक माहौल को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी। इस स्वीकृति में आधिकांश आदिवासी बहुल क्षेत्रों के कॉलेजों को शामिल किया गया है। नई दिल्ली के ट्रायबल यूथ हॉस्टल में सीटों की संख्या 50 से बढ़ाकर अब 185 कर दी गई है।

           नई दिल्ली में रहकर संघ लोक सेवा आयोग की सिविल सेवा की तैयारी करने के इच्छुक अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति तथा अन्य पिछड़ा वर्ग के अभ्यर्थियों के लिए अब इस हॉस्टल में तीन गुने से भी अधिक सीटें उपलब्ध होंगी। आईआईटी की तर्ज पर राज्य के जशपुर, बस्तर, कबीरधाम, रायपुर और रायगढ़ में प्रौद्योगिकी संस्थानों का निर्माण किया जाएगा। राज्य में छत्तीसगढ़ उच्च शिक्षा मिशन की स्थापना भी की जा रही है।

        स्थानीय बोलियों में प्रारंभिक शिक्षा प्रदान करने का निर्णय लिया गया है। यह नयी राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत आदिवासी समुदायों में शिक्षा की पहुंच बढ़ाने में महत्वपूर्ण कदम साबित होगा। 18 स्थानीय भाषा-बोलियों में स्कूली बच्चों की पुस्तकें तैयार की जा रही हैं। प्रथम चरण में छत्तीसगढ़ी, सरगुजिहा, हल्बी, सादरी, गोंड़ी और कुडुख में कोर्स तैयार किया जा रहा है।

        प्रदेश के 263 स्कूलों में पीएमयोजना शुरू की गई है, जिसके तहत इन स्कूलों को मॉडल स्कूल के रूप में विकसित किया जा रहा है। इस योजना के तहत स्कूलों में स्थानीय भाषाओं के साथ-साथ रोबोटिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस जैसे आधुनिक विषयों को भी पढ़ाया जाएगा। पीएमस्कूल आदिवासी बहुल इलाकों में भी स्कूलों को अपग्रेड किया रहा है, इससे इन क्षेत्रों के बच्चों को भी आधुनिक, ज्ञानपरक और कौशल युक्त शिक्षा मिल रही है।

          आदिवासी समुदाय के बच्चों के लिए बेेहतर शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए 75 एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय संचालित किए जा रहे हैं। इसके अलावा माओवादी प्रभावित क्षेत्र के बच्चों के लिए 15 प्रयास आवासीय विद्यालय संचालित है। इन विद्यालयों में मेधावी विद्यार्थियों को अखिल भारतीय मेडिकल और इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा की तैयारी कराई जा रही हैं। यकीनन, छत्तीसगढ़ में आदिवासी समाज से आने वाले मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य जनजातीय समाज के सर्वांगीण विकास के नए आयाम गढ़ रहा है।

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